स्टॉक मार्केट या शेयर बाजार
शेयर मार्केट का इतिहास
16वीं सदी में डच ईस्ट इंडिया कंपनी का विदेशी व्यापार में दबदबा था. कंपनी दुनियाभर में जहाजों के जरिए व्यापार कर रही थी. लेकिन जहाजों का संचालन एक महंगा सौदा था. इसलिए कंपनी ने हर बंदरगाह के आसपास रहने वाले व्यापारियों की मदद लेना तय किया.
कंपनी ने व्यापारियों से संपर्क कर कहा कि अगर वे जहाजों के संचालन में पैसा लगाते हैं तो जहाजों से होने वाले मुनाफे में भी उन्हें हिस्सा मिलेगा. हिस्से को अंग्रेजी में शेयर कहा जाता है. व्यापारियों को ये योजना पसंद आई और उन्होंने जहाजों के संचालन में पैसा निवेश किया. इस व्यापार और हिस्सेदारी को दुनिया का पहला शेयर मार्केट कहा जाता है.
शेयर मार्केट की वर्तमान स्थिति
शेयर मार्केट की खबरों में सेंसेक्स और निफ्टी का जिक्र भी बार बार आता है. ये दोनों इंडेक्स यानी सूचकांक हैं. सेंसेक्स दो शब्दों सेंसटिव और इंडेक्स से बनकर मिला है. हिंदी में इसे संवेदी सूचकांक कहते हैं. बीएसई में मुख्य तौर पर 30 बड़ी कंपनियां लिस्टेड हैं. इन 30 कंपनियों की सेहत से ही सेंसेक्स तय होता है. सेंसेक्स इन कंपनियों की वित्तीय सेहत का पैमाना है.
मार्केट कैप
मार्केट कैप मतलब शेयर बाजार में आने के बाद कंपनी की कुल पूंजी. मानकर चलिए किसी कंपनी के पास 10 लाख रुपये की पूंजी है. लेकिन उसे और पूंजी की जरूरत है. ऐसे में उसने पचास प्रतिशत हिस्से के शेयर जारी कर दिए. मानकर चलिए 1 लाख शेयर जारी किए गए जिनकी कीमत प्रति शेयर 10 रुपये थी. इसको आईपीओ निकालना कहा जाएगा. कंपनी को उम्मीद थी की इससे उन्हें 10 लाख रुपये मिलेंगे. लेकिन निवेशकों को कंपनी का आइडिया अच्छा लगा और उसके शेयरों की डिमांड बढ़ गई. कंपनी के शेयर 10 की जगह 50 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से बिके. ऐसे में कंपनी को 50 लाख रुपये की कमाई हुई. पूंजी की ये पूरी कमाई मार्केट कैपिटलाइजेशन या मार्केट कैप कहलाती है.
फ्री फ्लोट फैक्टर
अब जब कंपनी की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी पब्लिक में बिक गई है तो इस 50 प्रतिशत हिस्से से ही कंपनी का सूचकांक तय होगा. ये 50 प्रतिशत हिस्सा शेयर मार्केट के हिसाब से चलेगा. शेयर बाजार में बढ़ोत्तरी पर कंपनी का मार्केट कैप बढ़ेगा और घटने पर घटेगा. यह हिस्सा कंपनी के कामकाज से मुक्त यानी फ्री रहेगा. इसलिए इसे फ्री फ्लोट फैक्टर कहते हैं. इसकी कैल्कुलेशन का भी एक फॉर्मूला है.
जब कोई कंपनी अच्छा प्रदर्शन करती है, तो उसके शेयरों को लोग ज्यादा खरीदते हैं और उसकी डिमांड बढ़ जाती है. ऐसे ही जब किसी कंपनी के बारे में ये अनुमान लगाया जाए कि भविष्य में उसका मुनाफा कम होगा, तो कंपनी के शेयर गिर जाते हैं.
भारत जैसे कृषि प्रधान देश में बारिश अच्छी या खराब होने का असर भी शेयर मार्केट पर पड़ता है. खराब बारिश से बाजार में पैसा कम आएगा और मांग घटेगी. ऐसे में शेयर बाजार भी गिरता है. हर राजनीतिक घटना का असर भी शेयर बाजार पर पड़ता है. चीन और अमेरिका के कारोबारी युद्ध से लेकर ईरान-अमेरिका तनाव का असर भी शेयर बाजार पर पड़ता है. इन सब चीजों से व्यापार प्रभावित होते हैं.
व्यापार से संबंधित कारकों के अलावा, शेयरों की कीमतें अर्थव्यवस्थाओं, मुद्रास्फीति, ब्याज दरों, विदेशी बाजारों, वैश्विक वित्त और अधिक को बदलने से भी प्रभावित होती हैं। निवेशकों को बाजार के रुझान के शीर्ष पर रहने के लिए सक्षम होने के लिए बदलते घटनाक्रम के लिए बाहर देखना चाहिए। यह जानकारी उन्हें निर्णय लेने के लिए प्रेरित करती है जो नुकसान से बचने में मदद करेगी। जब बहुत सारे स्टॉक इतने हद तक प्रभावित होते हैं कि यह बाजार में लहर पैदा कर सकता है, तो यह स्टॉक मार्केट क्रैश का कारण बन सकता है।
स्टॉक मार्केट या शेयर बाजार बिना मेहनत के पैसा कमाने की जगह लोगों को लगती है, लेकिन ऐसा नहीं है । यह पैसिव इनकम कमाने का एक जरिया है परन्तु आजकल कोरोना वायरस के बाद के वर्षों में कुछ लोगों के लिए यह daily का व्यवसाय बन गया है ।
लोग एक दूसरे की देखा देखी शेयर बाजार में आते हैं परंतु ऐसा नहीं है । यहां पर विश्लेषण करके आना अति आवश्यक है। इसमें प्रवेश करने से पूर्व कुछ ज्ञान अवश्य ले लीजिए। शेयर बाजार की तकनीकी बारीकियां सीखिए । इसकी शब्दावली को पूरी तरह जानिए।
यह बात हकीकत है कि शेयर बाजार में कोई भी एक्सपोर्ट या विशेषज्ञ नहीं है, चाहे वह 20 से 25 वर्षों से अधिक यहां कार्य कर रहा हो। शायद इसी वजह से इसे सेंसेक्स अथवा सेंसिटिव इंडेक्स कहा जाता है क्यूंकि यह बाजार के मूड के आलावा काफी सारे फैक्टर्स पर कार्य करता है।
आजकल मल्टीबैगर स्टॉक्स ने आम आदमी को शेयर मार्केट की ओर अग्रसर होने पर मजबूर कर दिया है। यह मल्टीबैगर स्टॉक्स वह स्टॉक्स होते हैं जो शेयर मार्केट में बहुत ही कम दामों में मिलते हैं और उनका रेट अचानक ही बढ़ जाता है लेकिन इसके पीछे एक गणित कार्य करता है ।
शेयर बाजार में 2 तरीके की लॉबी काम करती हैं। एक वह होते हैं जो तेजड़िये कहे जाते है और दूसरे वह होते हैं जो मंदड़िये कहे जाते है।
तेजड़िये शेयर मार्केट में शेयर के रेट को ऊपर उठाने वाले लोग होते हैं इससे उन्हें फायदा होता है। मंदड़िये लोग मार्केट में शेयर के भाव को कम करते हैं इससे इन्हें कम करने में ही फायदा होता है।
अब जानते हैं शेयर का क्या अर्थ होता है ? शेयर का अर्थ होता है हिस्सेदारी। यह एक अंग्रेजी का शब्द है। मान लीजिए कोई कंपनी में एक लाख के शेयर जारी हुए हैं कोई व्यक्ति जितने शेयर उस कंपनी में खरीदता है उसे उसकी उतनी हिस्सेदारी उस कंपनी में मानी जाती है ,मान लीजिए किसी व्यक्ति ने 10000 शेयर खरीदे है तो वह उस कंपनी में 10% का हिस्सेदार माना जाता है ।
स्टॉक्स- स्टॉक उस कंपनी में उस व्यक्ति की हिस्सेदारी को दिखाता है व्यक्ति उस हिस्सेदारी को जब चाहे किसी अन्य को बेच सकता है और किसी अन्य से वह शेयर खरीद सकता है बशर्ते कि उसका शेयर मार्केट के अनुसार रजिस्टर्ड डिमैट अकाउंट हो।
भारत के सबसे बड़े दो स्टॉक एक्सचेंज को बीएसई और एनएसई कहा जाता है। बीएससी का अर्थ है बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और एनएससी का अर्थ है नेशनल स्टॉक एक्सचेंज। बीएससी और एनएससी में कंपनी के शेयर लिस्टेड किए जाते हैं, जो कंपनी की लाभदायकता के अनुसार शेयर का मूल्य दर्शाते है। यह पूरा शेयर बाजार सेबी द्वारा नियंत्रित होता है। सेबी अर्थात भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड या सिक्योरिटीज एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया।
सेबी की अनुमति के बिना कोई भी कंपनी अपना आईपीओ अर्थात इनिशियल पब्लिक आफरिंग जारी नहीं कर सकती। कोई भी कंपनी स्टॉक मार्केट में सूचीबद्ध होने के लिए स्टॉक एक्सचेंज में निश्चित सौदा करती है जिसके अनुसार उस कंपनी का समय समय पर अपनी गतिविधियों की जानकारी बाजार को देना जरूरी होता है। इस जानकारी का प्रभाव निवेशकों पर पड़ता है ,जिससे निवेशक कंपनी का मूल्यांकन कर पाते हैं और इसी के आधार पर कंपनी के शेयर की मांग घटती या बढ़ती है और शेयर की कीमत ऊपर नीचे होती है। अगर कोई कंपनी सेबी के नियमों का पालन नहीं करती तो सेबी उसे एक्सचेंज से हटाने का अधिकार रखती है ।
आइए जानते हैं शेयर के प्रकार - सामान्य शेर कॉमन शेयर्स वे होते हैं जिनकी संख्या सबसे अधिक है। बोनस शेयर या लाभांश शेयर कंपनी देती है जो कि उसके मौजूदा लाभांश का एक अंश होता है।
आइए जानते हैं । stock कैसे खरीदें ? यह आप पर निर्भर करता है कि आप खुद स्टॉक्स खरीदना चाहते हैं या किसी ब्रोकर की मदद से ? ब्रोकर आपका उचित प्रकार से मार्गदर्शन करके उसके बदले कोई निश्चित फीस लेता है या आपके धन का प्रतिशत वह लेता है ।
किसी वस्तु या सेवा को कुछ समय के बाद लाभ ना पाने की अपेक्षा से जब आप खरीदते हैं तो वह ट्रेडिंग कहलाता है यह शेयर बाजार का सबसे प्रचलित शब्द है, सरल शब्दों में लाभ कमाने के उद्देश्य से स्टॉक को खरीदना या बेचना ट्रेडिंग कहलाता है।
शेयर खरीदना तब चाहिए जब उसका दाम कम हो और होल्ड करके उसे रखो फिर तब बेचो जब उसका दाम अधिकतम ऊंचाई पर आ जाएं परंतु शेयर मार्केट में इतनी अनिश्चितता बनी रहती है कि मार्केट कब घटेगा या बढ़ेगा या कोई विशेषज्ञ भी नहीं कह पाता ।
आइए जानते हैं ट्रेडिंग के प्रकार -
इंट्राडे -
1 दिन के लिए किया जाने वाला बाय/सेल का प्रकार है
स्विंग ट्रेडिंग -
इसमें शेयर खरीदने के बाद कुछ हफ्ते दिन नया महीने के बाद लाभ मिलने पर बेचा जाता है
तीसरा प्रकार है -
स्कल्पिंग वास्तविक समय के तकनीकी विश्लेषण के आधार पर व्यापार करने की एक विधि है। फोरेक्स ट्रेडिंग में स्कल्पिंग का मतलब है आमतौर पर बड़ी संख्या में ट्रेडों को रखना, ताकी प्रत्येक ट्रेड से छोटा मुनाफा कमाया जा सके। कई घंटों, दिनों या हफ्तों के लिए एक स्थिति रखने के बजाय, स्कैल्पिंग का मुख्य लक्ष्य कुछ ही मिनटों में कुछ पिप्स प्राप्त करना है।
कंपनी के बारे में पूरी और सही जानकारी हो तो स्टॉक मार्केट में मुनाफा कमाया जा सकता है
आइए अब जानते हैं खाता कैसे खोलें ?
खाता खोलने के लिए आपको केवाईसी करवाना होगा और demat एवं ट्रेडिंग अकाउंट खोलना होगा ।
डिमैट अकाउंट में आपके शेर डिजिटल फॉर्म में सुरक्षित रखे जाते हैं और ट्रेडिंग अकाउंट में आप धनराशि जमा रखते हैं जिससे आप ट्रेड कर सकते हैं या शेयर को खरीद व बेच सकते हैं। इस कार्य में मदद के लिए कुछ ब्रोकेरिंग फर्म्स है जो आपने कुछ प्रतिशत मुनाफा लेकर आपको ट्रेडिंग में मदद करती है - इनमे प्रमुख है - groww , Zerodha , Upstox आदि।
फिर मार्केट के विशेषज्ञ कैंडल चार्ट को देखकर अर्थात मोमबत्ती चार्ट को देखकर शेयर मार्केट के बारे में बताते हैं कि कौन से समय शेर खरीदना और बेचना उचित है कैंडल चार्ट में लाल और हरी दो प्रकार के कलर वाली मोमबत्तियां होती है जो मार्केट के अप्प ट्रेंड या डाउनट्रेंड को दर्शाती है ।
शेयर बाजार में दो महत्वपूर्ण कारक कार्य करते हैं - डर और लालच
share का दाम बढ़ने पर लालच आप पर हावी होता है और share का दाम घटने पर डर आप पर हावी होता है और इसी का फायदा किसी ना किसी निवेशक को हो रहा होता है। अगर आप शेयर बाजार में सफल होना चाहते हैं तो आपका धन है इसीलिए निर्णय भी आपको ही लेना होगा कि आपको मार्केट में कब आना है और मार्केट को कब छोड़ना है कब शेयर को खरीदना है और कब शेयर को बेचना है ।













